फेब्राइल सीजर

बुखार के साथ दौरा (Febrile Seizure)

फेब्राइल सीजर यह क्या है?

बुखार के साथ दौरा एक ऐसी स्थिति है जो 6 महीने से 5 साल तक के छोटे बच्चों में होती है। जब बच्चे को बुखार आता है (100.4°F या 38°C से ऊपर), तो कभी-कभी उनके दिमाग में एक प्रकार का “शॉर्ट सर्किट” हो जाता है, जिससे दौरा पड़ता है।

सबसे पहले समझें: यह बहुत डरावना लगता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में सुरक्षित है!

फेब्राइल सीजर कैसे पहचानें?

जरूरी बातें:

  • बच्चे की उम्र 6 महीने से 5 साल के बीच हो
  • बुखार (100.4°F से ऊपर)

दौरे के दौरान ये चीजें दिख सकती हैं:

  • पूरे शरीर में झटके (हाथ-पैर हिलना)
  • आंखें ऊपर चढ़ जाना
  • मुंह से झाग निकलना
  • बेहोशी या सुस्ती
  • कभी-कभी पेशाब निकल जाना
  • सांस तेज़ होना

दौरे के दौरान तुरंत करें:

करें DOs:

  1. घबराएं नहीं, शांत रहें
  2. बच्चे को करवट (साइड) में लिटाएं, सिर हल्का पीछे करें
  3. टाइम देखें: दौरा कितनी देर चला, यह जानना जरूरी है
  4. कपड़े ढीले कर दें
  5. आस-पास से खतरनाक चीजें हटा दें
  6. अगर हो सके तो मोबाइल से वीडियो बनाएं (डॉक्टर को दिखाने के लिए)

Don’ts (बिल्कुल न करें):

  1. मुंह में कुछ भी न डालें (पानी, दवाई, चम्मच कुछ नहीं)
  2. दांत खोलने की कोशिश न करें
  3. बच्चे को हिलाएं या झकझोरें नहीं
  4. भीड़ न लगाएं

दौरे के बाद: तुरंत डॉक्टर के पास जाएं अगर:

  • पहली बार दौरा आया हो
  • दौरा 5 मिनट से ज्यादा चला हो
  • दिन में एक से ज्यादा बार दौरा आया हो
  • बच्चा सामान्य नहीं लग रहा हो

सामान्य स्थिति में:

  • बच्चे को आराम से सुलाएं
  • बुखार कम करने की दवाई दें (पैरासिटामोल)
  • पानी पिलाते रहें
  • डॉक्टर से सलाह लें

दो प्रकार के दौरे:

1. सामान्य दौरा (Simple)

  • 5 मिनट से कम
  • दिन में सिर्फ एक बार
  • पूरे शरीर में
  • ज्यादा चिंता की बात नहीं

2. जटिल दौरा (Complex)

  • 5 मिनट से ज्यादा
  • दिन में कई बार
  • शरीर के एक हिस्से में
  • डॉक्टर की तुरंत जरूरत

भविष्य में क्या हो सकता है?

अच्छी खबरें:

  1. 95-98% बच्चे बिल्कुल सामान्य रह जाते हैं
  2. दिमाग पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता
  3. पढ़ाई-लिखाई में कोई दिक्कत नहीं
  4. ज्यादातर बच्चों में 5 साल बाद बंद हो जाता है

ध्यान देने वाली बातें:

  1. 30-35% बच्चों में दोबारा हो सकता है
  2. अगर पहली बार 1 साल से कम उम्र में हुआ हो तो दोबारा होने का चांस ज्यादा
  3. मिर्गी (Epilepsy) का खतरा बहुत कम (सिर्फ 1-2%)

इलाज:

मुख्य फोकस:

  1. बुखार को काबू में रखना:
    • सही समय पर पैरासिटामोल
    • हल्का गुनगुना स्पंज

दवाइयां:

  • दौरा रोकने वाली दवाई आमतौर पर रोजाना जरूरी नहीं
  • सिर्फ खास मामलों में डॉक्टर emergency दवाई दे सकते हैं

बचाव:

  1. बुखार को हल्के में न लें
  2. समय पर बुखार की दवाई दें
  3. बच्चे को पानी पिलाते रहें
  4. First Aid सीखें (खुद को और परिवार को)
  5. अगर risk ज्यादा है तो डॉक्टर से emergency medicine के बारे में पूछें

कब तुरंत अस्पताल जाएं?

Emergency:

  1. दौरा 5 मिनट से ज्यादा चल रहा हो
  2. सांस लेने में दिक्कत हो
  3. बच्चा नीला पड़ रहा हो
  4. दौरे के बाद बहुत देर तक होश न आए

याद रखें:

  1. घबराहट सबसे बड़ी दुश्मन है
  2. सही first aid जानना जरूरी है
  3. ज्यादातर मामलों में बच्चा बिल्कुल ठीक हो जाता है
  4. डॉक्टर से नियमित संपर्क बनाए रखें

जरूरी सूचना: यह जानकारी सामान्य शिक्षा के लिए है। किसी भी medical emergency में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।